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Allah Ki Raza Ki 8 Nishaniyan: जब अल्लाह राज़ी होता है तो क्या होता है?

क्या अल्लाह आपसे खुश है? जानिए वो 8 खास निशानियां जो बताती हैं कि अल्लाह अपने बंदे से राज़ी है। अगर आपमें ये आदतें हैं, तो यह अल्लाह की रहमत है।

Allah Ki Raza Ki 8 Nishaniyan: जब अल्लाह राज़ी होता है तो क्या होता है?

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हर मोमिन के दिल में यह सवाल ज़रूर आता है कि “क्या मेरा रब मुझसे राज़ी है?” हम इबादत करते हैं, नेकी करते हैं, लेकिन यह कैसे पता चले कि अल्लाह ने हमारी कोशिशों को कबूल किया है या नहीं?

उलमा और बुजुर्गों ने कुरान और हदीस की रौशनी में कुछ ऐसी निशानियां बताई हैं जो अगर किसी इंसान में नज़र आएं, तो यह इस बात का इशारा है कि अल्लाह उस बंदे से खुश है।

इस आर्टिकल में हम उन 8 निशानियों के बारे में जानेंगे जो अल्लाह की रज़ा और खुश होने का सबूत हैं।

1. नेकी की तौफीक मिलना (Guidance to do Good)

सबसे बड़ी निशानी यह है कि अल्लाह उस बंदे के लिए नेकी का रास्ता आसान कर देता है। अगर आपको नमाज़ पढ़ने, कुरान पढ़ने या किसी की मदद करने में सुकून मिलता है और यह काम आप आसानी से कर पाते हैं, तो यह अल्लाह की रज़ा की निशानी है।

2. गुनाहों से हिफाज़त (Protection from Sins)

जब अल्लाह किसी से खुश होता है, तो उसे गुनाहों से बचा लेता है। अगर कभी उस बंदे का दिल गुनाह की तरफ माइल भी हो, तो अल्लाह कोई न कोई ऐसी रुकावट पैदा कर देता है कि वह गुनाह से बच जाता है। और अगर गलती हो भी जाए, तो फौरन तौबा की तौफीक मिल जाती है।

3. अल्लाह के फैसले पर राज़ी रहना (Contentment)

अल्लाह का पसंदीदा बंदा हर हाल में खुश रहता है। चाहे अमीरी हो या गरीबी, सेहत हो या बीमारी, वह शिकायत नहीं करता। वह समझता है कि यह सब अल्लाह की तरफ से है और उसी में भलाई है।

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4. लोगों के दिलों में मोहब्बत (Love in People’s Hearts)

हदीस में आता है कि जब अल्लाह किसी बंदे से मोहब्बत करता है, तो जिब्रील (अ.स.) को हुक्म देता है कि मैं फलां से मोहब्बत करता हूँ, तुम भी उससे मोहब्बत करो। फिर आसमान वालों में ऐलान होता है और ज़मीन वालों के दिलों में उस शख्स के लिए मोहब्बत डाल दी जाती है। अगर नेक लोग आपसे मोहब्बत करते हैं, तो यह अल्लाह की रज़ा की निशानी है।

5. चेहरे पर नूर और सुकून

नेकी और अल्लाह की याद से चेहरे पर एक रूहानी चमक (नूर) और दिल में सुकून पैदा होता है। अल्लाह फरमाता है: “बेशक अल्लाह की याद ही से दिलों को सुकून मिलता है।” (सूरह रअद)

6. रिज्क में बरकत (Blessing in Provision)

बरकत का मतलब सिर्फ ज़्यादा पैसा होना नहीं है, बल्कि थोड़े में भी ज़रूरतें पूरी होना और दिल का मुतमइन होना है। अल्लाह अपने महबूब बंदों के रिज्क में ऐसी बरकत डाल देता है कि उन्हें किसी के आगे हाथ फैलाने की ज़रूरत नहीं पड़ती।

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7. आखिरत की फिक्र (Worry for the Hereafter)

जिससे अल्लाह खुश होता है, उसके दिल से दुनिया की लालच निकाल देता है और आखिरत की फिक्र डाल देता है। वह दुनिया में रहता तो है, लेकिन उसका असल मकसद अल्लाह को राज़ी करना और जन्नत पाना होता है।

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8. नेक लोगों की सोहबत (Company of the Righteous)

अल्लाह उस बंदे को अच्छे और नेक दोस्तों की सोहबत अता करता है जो उसे अल्लाह की याद दिलाते हैं। बुरे दोस्तों से उसका दिल खुद-ब-खुद उचाट हो जाता है।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. कैसे पता चले कि अल्लाह मुझसे नाराज़ है?
A.

अगर इबादत में दिल न लगे, गुनाहों में मज़ा आने लगे और दिल सख्त हो जाए (किसी की तकलीफ पर असर न हो), तो यह अल्लाह की नाराज़गी और दिल के मुर्दा होने की निशानी हो सकती है।

Q. क्या मालदार होना अल्लाह के खुश होने की निशानी है?
A.

नहीं, माल-ओ-दौलत अल्लाह की रज़ा का पैमाना नहीं है। अल्लाह दुनिया उसे भी देता है जिससे वह खुश नहीं होता (जैसे फिरौन, कारून), लेकिन दीन और हिदायत सिर्फ उसे देता है जिससे वह खुश होता है।


नतीजा (Conclusion)

अगर आप अपने अंदर ये निशानियां पाते हैं, तो अल्लाह का शुक्र अदा करें और नेकी पर जमे रहें। और अगर कमी महसूस हो, तो मायूस न हों, अल्लाह से तौबा करें और हिदायत की दुआ मांगें। अल्लाह बड़ा मेहरबान है।

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