40 Rabbana Duas from Quran in Hindi (रब्बना दुआएं कुरान से)
कुरान की 40 मशहूर "रब्बना" दुआएं पढ़ें, जो 'ऐ हमारे रब' से शुरू होती हैं। हर दुआ अरबी, हिंदी उच्चारण और तर्जुमे के साथ। (40 Rabbana Duas with Hindi Translation)

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“रब्बना” (Rabbana) का मतलब है “ऐ हमारे रब”। कुरान-ए-करीम में बहुत सी ऐसी दुआएं हैं जो इस खूबसूरत लफ्ज़ से शुरू होती हैं। ये वो दुआएं हैं जो अंबिया (नबियों), सहाबा और नेक लोगों ने अल्लाह से मांगी थीं और अल्लाह ने उन्हें हमारे लिए कुरान में महफूज़ कर दिया।
ये दुआएं बहुत जामे (comprehensive) हैं और दुनिया और आखिरत की तमाम भलाइयों को अपने अंदर समेटे हुए हैं। इस आर्टिकल में हम कुरान की 40 मशहूर रब्बना दुआएं हिंदी तर्जुमे के साथ जानेंगे।
1. दुनिया और आखिरत की भलाई की दुआ
رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ
रब्बना आतिना फिद-दुन्या हसनतन व फिल आखिरति हसनतन वकिना अज़ाबन-नार।
ऐ हमारे रब! हमें दुनिया में भलाई अता फरमा और आखिरत में भी भलाई अता फरमा और हमें आग के अज़ाब से बचा।
(सूरह अल-बकरा: 201)
2. सब्र और साबित क़दमी की दुआ
رَبَّنَا أَفْرِغْ عَلَيْنَا صَبْرًا وَثَبِّتْ أَقْدَامَنَا وَانصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِرِينَ
रब्बना अफरिग अलैना सबरन व सब्बित अकदामना वनसुरना अलल कौमिल काफ़िरीन।
ऐ हमारे रब! हम पर सब्र उंडेल दे, हमारे क़दमों को जमा दे और काफिर कौम के मुकाबले में हमारी मदद फरमा।
(सूरह अल-बकरा: 250)
3. भूल-चूक की माफ़ी की दुआ
رَبَّنَا لَا تُؤَاخِذْنَا إِن نَّسِينَا أَوْ أَخْطَأْنَا
रब्बना ला तुआखिज़ना इन-नसीना अव अख़-तअना।
ऐ हमारे रब! अगर हम भूल गए हों या हमसे कोई गलती हो गई हो, तो हमारी पकड़ न फरमा।
(सूरह अल-बकरा: 286)
4. मुश्किल बोझ से पनाह की दुआ
رَبَّنَا وَلَا تَحْمِلْ عَلَيْنَا إِصْرًا كَمَا حَمَلْتَهُ عَلَى الَّذِينَ مِن قَبْلِنَا
रब्बना वला तहमिल अलैना इसरन कमा हमल-तहु अलल-लज़ीना मिन कबलिना।
ऐ हमारे रब! हम पर वैसा बोझ न डाल जैसा तूने हमसे पहले लोगों पर डाला था।
(सूरह अल-बकरा: 286)
5. नाक़ाबिले बर्दाश्त बोझ से पनाह
رَبَّنَا وَلَا تُحَمِّلْنَا مَا لَا طَاقَةَ لَنَا بِهِ
रब्बना वला तुहम्मिलना मा ला ता-क़-त लना बिह।
ऐ हमारे रब! हम पर वो बोझ न डाल जिसे उठाने की हममें ताकत नहीं।
(सूरह अल-बकरा: 286)
6. माफ़ी और रहमत की दुआ
وَاعْفُ عَنَّا وَاغْفِرْ لَنَا وَارْحَمْنَا ۚ أَنتَ مَوْلَانَا فَانصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِرِينَ
वअ्फु अन्ना वग़फिर लना वरह़मना, अं-त मौलाना फनसुरना अलल कौमिल काफ़िरीन।
हमें माफ़ फरमा, हम पर रहम फरमा, तू ही हमारा मौला है, पस काफिरों के मुकाबले में हमारी मदद फरमा।
(सूरह अल-बकरा: 286)
7. हिदायत के बाद गुमराही से पनाह
رَبَّنَا لَا تُزِغْ قُلُوبَنَا بَعْدَ إِذْ هَدَيْتَنَا وَهَبْ لَنَا مِن لَّدُنكَ رَحْمَةً ۚ إِنَّكَ أَنتَ الْوَهَّابُ
रब्बना ला तुज़िग़ कुलूबना बअ्-द इज़ हदैतना व हब लना मिन लदुन-क रह़मतन, इन्न-क अं-तल वह्हाब।
ऐ हमारे रब! जब तूने हमें हिदायत दे दी है तो हमारे दिलों को टेढ़ा न कर और हमें अपने पास से रहमत अता फरमा, बेशक तू ही बहुत अता करने वाला है।
(सूरह आले-इमरान: 8)
8. ईमान लाने वालों की दुआ
رَبَّنَا إِنَّنَا آمَنَّا فَاغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ
रब्बना इन्नना आमन्ना फग़फिर लना ज़ुनूबना वकिना अज़ाबन-नार।
ऐ हमारे रब! हम ईमान ले आए, पस हमारे गुनाहों को माफ़ फरमा और हमें आग के अज़ाब से बचा।
(सूरह आले-इमरान: 16)
9. अल्लाह की रज़ा के लिए दुआ
رَبَّنَا آمَنَّا بِمَا أَنزَلْتَ وَاتَّبَعْنَا الرَّسُولَ فَاكْتُبْنَا مَعَ الشَّاهِدِينَ
रब्बना आमन्ना बिमा अंज़ल-त वत्त-बअ्नर-रसू-ल फकतुबना म-अश-शाहिदीन।
ऐ हमारे रब! जो कुछ तूने नाज़िल किया है हम उस पर ईमान लाए और हमने रसूल की पैरवी की, पस हमें गवाही देने वालों में लिख ले।
(सूरह आले-इमरान: 53)
10. गुनाहों की माफ़ी और हिम्मत की दुआ
رَبَّنَا اغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَإِسْرَافَنَا فِي أَمْرِنَا وَثَبِّتْ أَقْدَامَنَا وَانصُرْنَا عَلَى الْقَوْmِ الْكَافِرِينَ
रब्ब-नग़-फिर लना ज़ुनूबना व इसरा-फना फ़ी अमरिना व सब्बित अकदामना वनसुरना अलल कौमिल काफ़िरीन।
ऐ हमारे रब! हमारे गुनाहों को और हमारे कामों में हमसे होने वाली ज़्यादतियों को माफ़ फरमा, और हमें साबित क़दम रख और काफिर कौम पर हमारी मदद फरमा।
(सूरह आले-इमरान: 147)
11. अल्लाह की निशानियों पर गौर करने वालों की दुआ
رَبَّنَا مَا خَلَقْتَ هَٰذَا بَاطِلًا سُبْحَانَكَ فَقِنَا عَذَابَ النَّارِ
रब्बना मा ख़लक़-त हाज़ा बातिलन सुबहान-क फकिना अज़ाबन-नार।
ऐ हमारे रब! तूने यह सब कुछ बेकार पैदा नहीं किया। तू पाक है, पस हमें आग के अज़ाब से बचा ले।
(सूरह आले-इमरान: 191)
12. जहन्नम की रुसवाई से पनाह
رَبَّنَا إِنَّكَ مَن تُدْخِلِ النَّارَ فَقَدْ أَخْزَيْتَهُ ۖ وَمَا لِلظَّالِمِينَ مِنْ أَنصَارٍ
रब्बना इन्न-क मन तुद-ख़िलिन-नारा फकद अख़ज़ै-तह, व मा लिज़-ज़ालिमी-न मिन अंसार।
ऐ हमारे रब! बेशक जिसे तूने आग में दाखिल किया, उसे तूने रुसवा कर दिया, और ज़ालिमों का कोई मददगार नहीं।
(सूरह आले-इमरान: 192)
13. ईमान की पुकार सुनने वालों की दुआ
رَّبَّنَا إِنَّنَا سَمِعْنَا مُنَادِيًا يُنَادِي لِلْإِيمَانِ أَنْ آمِنُوا بِرَبِّكُمْ فَآمَنَّا
रब्बना इन्नना समिअ्ना मुनादियन युनादी लिल-ईमानि अन आमिनू बिरब्बिकुम फ-आमन्ना।
ऐ हमारे रब! हमने एक पुकारने वाले को सुना जो ईमान की तरफ बुला रहा था कि अपने रब पर ईमान लाओ, तो हम ईमान ले आए।
(सूरह आले-इमरान: 193)
14. गुनाहों की माफ़ी और जन्नत की दुआ
رَبَّنَا فَاغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَكَفِّرْ عَنَّا سَيِّئَاتِنَا وَتَوَفَّنَا مَعَ الْأَبْرَارِ
रब्बना फग़फिर लना ज़ुनूबना व कफ्फिर अन्ना सय्यि-आतिना व तवफ्फना म-अल अबरार।
ऐ हमारे रब! पस हमारे गुनाहों को माफ़ कर दे और हमारी बुराइयों को हमसे दूर कर दे और हमें नेकोंकारों के साथ मौत दे।
(सूरह आले-इमरान: 193)
15. नबियों के वादे को पूरा करने की दुआ
رَبَّnَا وَآتِنَا مَا وَعَدتَّنَا عَلَىٰ رُسُلِكَ وَلَا تُخْزِنَا يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۗ إِنَّكَ لَا تُخْلِفُ الْمِيعَادَ
रब्बना व आतिना मा व-अद-तना अला रुसुलि-क वला तुख़-ज़िना यौमल कियामह, इन्न-क ला तुख़लिफुल मीआद।
ऐ हमारे रब! और हमें वो सब कुछ अता फरमा जिसका तूने अपने रसूलों के ज़रिये हमसे वादा किया है और हमें क़यामत के दिन रुसवा न करना। बेशक तू वादे के खिलाफ नहीं करता।
(सूरह आले-इमरान: 194)
16. ज़ुल्म की माफ़ी की दुआ
رَبَّنَا ظَلَمْنَا أَنفُسَنَا وَإِن لَّمْ تَغْفِرْ لَنَا وَتَرْحَمْنَا لَنَكُونَنَّ مِنَ الْخَاسِرِينَ
रब्बना ज़-लमना अनफु-सना व इल-लम तग़फिर लना व तर-ह़मना ल-नकुनन्ना मिनल ख़ासिरीन।
ऐ हमारे रब! हमने अपनी जानों पर ज़ुल्म किया, और अगर तूने हमें माफ़ न किया और हम पर रहम न किया तो हम ज़रूर घाटा उठाने वालों में से हो जाएंगे।
(सूरह अल-आराफ़: 23)
17. ज़ालिमों से दूरी की दुआ
رَبَّنَا لَا تَجْعَلْنَا مَعَ الْقَوْمِ الظَّالِمِينَ
रब्बना ला तज’अलना म-अल क़ौमिज़-ज़ालिमीन।
ऐ हमारे रब! हमें ज़ालिम कौम के साथ शामिल न कर।
(सूरह अल-आराफ़: 47)
18. हक़ के फैसले की दुआ
رَبَّنَا افْتَحْ بَيْنَنَا وَبَيْنَ قَوْمِنَا بِالْحَقِّ وَأَنتَ خَيْرُ الْفَاتِحِينَ
रब्ब-नफ-तह बैनना व बैना क़ौमिना बिल-ह़क़्क़ि व अंता ख़ैरुल फ़ातिहीन।
ऐ हमारे रब! हमारे और हमारी कौम के दर्मियान हक़ के साथ फैसला कर दे, और तू सबसे बेहतर फैसला करने वाला है।
(सूरह अल-आराफ़: 89)
19. सब्र और इस्लामी मौत की दुआ
رَبَّنَا أَفْرِغْ عَلَيْنَا صَبْرًا وَتَوَفَّنَا مُسْلِمِينَ
रब्बना अफ़रिग़ अलैना सबरन व त-वफ़्फ़ना मुस्लिमीन।
ऐ हमारे रब! हम पर सब्र उंडेल दे और हमें मुसलमान होने की हालत में मौत दे।
(सूरह अल-आराफ़: 126)
20. ज़ालिमों के फितने से पनाह
رَبَّنَا لَا تَجْعَلْنَا فِتْنَةً لِّلْقَوْمِ الظَّالِمِينَ وَنَجِّنَا بِرَحْمَتِكَ مِنَ الْقَوْمِ الْكَافِرِينَ
रब्बना ला तज’अलना फ़ितनतल-लिल क़ौमिज़-ज़ालिमीन, व नज्जिना बि-रह़मति-क मिनल क़ौमिल काफ़िरीन।
ऐ हमारे रब! हमें ज़ालिम कौम के लिए आज़माइश न बना, और हमें अपनी रहमत से काफिर कौम से निजात दे।
(सूरह यूनुस: 85-86)
21. बे-इल्मी से पनाह की दुआ
رَبِّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ أَنْ أَسْأَلَكَ مَا لَيْسَ لِي بِهِ عِلْمٌ ۖ وَإِلَّا تَغْفِرْ لِي وَتَرْحَمْنِي أَكُن مِّنَ الْخَاسِرِينَ
रब्बी इन्नी अऊज़ु बिक अन अस-अल-क मा लै-स ली बिही इल्मुन, व इल्ला तग़फिर ली व तर-ह़मनी अकुम-मिनल ख़ासिरीन।
ऐ मेरे रब! मैं तेरी पनाह मांगता हूँ इस बात से कि तुझसे वो चीज़ मांगूं जिसका मुझे इल्म नहीं। और अगर तूने मुझे माफ़ न किया और मुझ पर रहम न किया तो मैं घाटा उठाने वालों में से हो जाऊंगा।
(सूरह हूद: 47)
22. नमाज़ क़ायम करने की दुआ
رَبِّ اجْعَلْنِي مُقِيمَ الصَّلَاةِ وَمِن ذُرِّيَّتِي ۚ رَبَّنَا وَتَقَبَّلْ دُعَاءِ
रब्बिज-अलनी मुक़ीमस-सलाति व मिन ज़ुर्रिय्यती, रब्बना व तक़ब्बल दुआ।
ऐ मेरे रब! मुझे नमाज़ क़ायम करने वाला बना और मेरी औलाद में से भी। ऐ हमारे रब! और मेरी दुआ क़बूल फरमा।
(सूरह इब्राहीम: 40)
23. अमल क़बूल होने की दुआ
رَبَّنَا تَقَبَّلْ مِنَّا ۖ إِنَّكَ أَنتَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
रब्बना तक़ब्बल मिन्ना, इन्न-क अंतस-समीउल अलीम।
ऐ हमारे रब! हमसे (यह खिदमत) क़बूल फरमा। बेशक तू ही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
(सूरह अल-बकरा: 127)
24. फरमाबरदार बनने की दुआ
رَبَّنَا وَاجْعَلْنَا مُسْلِمَيْنِ لَكَ وَمِن ذُرِّيَّتِنَا أُمَّةً مُّسْلِمَةً لَّكَ وَأَرِنَا مَنَاسِكَنَا وَتُبْ عَلَيْنَا ۖ إِنَّكَ أَنتَ التَّوَّابُ الرَّحِيمُ
रब्बना वज-अलना मुस्लिमैनी ल-क व मिन ज़ुर्रिय्यतिना उम्मतम-मुस्लिमतल-ल-क व अरिना मनासि-कना व तुब अलैना, इन्न-क अंतत-तव्वाबुर-रहीम।
ऐ हमारे रब! हमें अपना फरमाबरदार बना और हमारी औलाद में से भी एक ऐसी उम्मत बना जो तेरी फरमाबरदार हो, और हमें हमारी इबादत के तरीके बता और हमारी तौबा क़बूल फरमा। बेशक तू ही तौबा क़बूल करने वाला, रहम करने वाला है।
(सूरह अल-बकरा: 128)
25. नेक औलाद की दुआ
رَبِّ هَبْ لِي مِنَ الصَّالِحِينَ
रब्बी हब ली मिनस-सालिहीन।
ऐ मेरे रब! मुझे एक नेक (औलाद) अता फरमा।
(सूरह अस-साफ़्फ़ात: 100)
26. अल्लाह पर भरोसे की दुआ
رَبَّنَا عَلَيْكَ تَوَكَّلْنَا وَإِلَيْكَ أَنَبْنَا وَإِلَيْكَ الْمَصِيرُ
रब्बना अलै-क तवक्कलना व इलै-क अनबना व इलैकल मसीर।
ऐ हमारे रब! हमने तुझ पर ही भरोसा किया और तेरी ही तरफ रुजू किया और तेरी ही तरफ लौटना है।
(सूरह अल-मुम्तहना: 4)
27. काफिरों के फितने से पनाह
رَبَّنَا لَا تَجْعَلْنَا فِتْنَةً لِّلَّذِينَ كَفَرُوا وَاغْفِرْ لَنَا رَبَّنَا ۖ إِنَّكَ أَنتَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
रब्बना ला तज’अलना फ़ितनतल-लिल-लज़ीना क-फरू वग़फिर लना रब्बना, इन्न-क अं-तल अज़ीज़ुल हकीम।
ऐ हमारे रब! हमें उन लोगों के लिए आज़माइश न बना जिन्होंने कुफ्र किया, और हमें माफ़ फरमा ऐ हमारे रब! बेशक तू ही ज़बरदस्त, हिकमत वाला है।
(सूरह अल-मुम्तहना: 5)
28. नूर मुकम्मल होने की दुआ
رَبَّنَا أَتْمِمْ لَنَا نُورَنَا وَاغْفِرْ لَنَا ۖ إِنَّكَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
रब्बना अतमिल-लना नूरना वग़फिर लना, इन्न-क अला कुल्लि शैइन क़दीर।
ऐ हमारे रब! हमारे लिए हमारे नूर को मुकम्मल कर दे और हमें माफ़ फरमा। बेशक तू हर चीज़ पर क़ादिर है।
(सूरह अत-तहरीम: 8)
29. पाकीज़ा औलाद की दुआ
رَبِّ هَبْ لِي مِن لَّدُنكَ ذُرِّيَّةً طَيِّبَةً ۖ إِنَّكَ سَمِيعُ الدُّعَاءِ
रब्बी हब ली मिन लदुन-क ज़ुर्रिय्य-तन तय्यि-बतन, इन्न-क समीउद-दुआ।
ऐ मेरे रब! मुझे अपनी तरफ से पाकीज़ा औलाद अता फरमा। बेशक तू ही दुआ सुनने वाला है।
(सूरह आले-इमरान: 38)
30. अकेलेपन से निजात की दुआ
رَبِّ لَا تَذَرْنِي فَرْدًا وَأَنتَ خَيْرُ الْوَارِثِينَ
रब्बी ला त-ज़रनी फ़रदन व अंता खैरुल वारिसीन।
ऐ मेरे रब! मुझे अकेला न छोड़, और तू सबसे बेहतर वारिस है।
(सूरह अल-अंबिया: 89)
31. काम में आसानी की दुआ
رَبِّ اشْرَحْ لِي صَدْرِي وَيَسِّرْ لِي أَمْرِي وَاحْلُلْ عُقْدَةً مِّن لِّسَانِي يَفْقَهُوا قَوْلِي
रब्बिश-रह़ ली सदरी, व यस्सिर ली अमरी, वहलुल उक़दतम-मिल-लिसानी, यफ़क़हू क़ौली।
ऐ मेरे रब! मेरा सीना खोल दे, और मेरे काम को मेरे लिए आसान कर दे, और मेरी ज़बान की गिरह खोल दे, ताकि लोग मेरी बात समझ सकें।
(सूरह ता-हा: 25-28)
32. गुनाह की माफ़ी की दुआ
رَبِّ إِنِّي ظَلَمْتُ نَفْسِي فَاغْفِرْ لِي
रब्बी इन्नी ज़लमतु नफ़्सी फग़फिर ली।
ऐ मेरे रब! बेशक मैंने अपनी जान पर ज़ुल्म किया, पस मुझे माफ़ फरमा दे।
(सूरह अल-क़सस: 16)
33. फसादियों के खिलाफ मदद की दुआ
رَبِّ انصُرْنِي عَلَى الْقَوْمِ الْمُفْسِدِينَ
रब्बिन-सुरनी अलल क़ौमिल मुफ़सिदीन।
ऐ मेरे रब! फसाद करने वाली कौम के मुकाबले में मेरी मदद फरमा।
(सूरह अल-अनकबूत: 30)
34. जहन्नम के अज़ाब से पनाह
رَبَّنَا اصْرِفْ عَنَّا عَذَابَ جَهَنَّمَ ۖ إِنَّ عَذَابَهَا كَانَ غَرَامًا
रब्ब-नस-रिफ़ अन्ना अज़ा-ब जहन्न-म, इन्ना अज़ा-बहा का-न ग़रामा।
ऐ हमारे रब! हमसे जहन्नम का अज़ाब दूर कर दे, बेशक उसका अज़ाब चिमट जाने वाला है।
(सूरह अल-फ़ुरक़ान: 65)
35. हिसाब के दिन माफ़ी की दुआ
رَبَّنَا اغْفِرْ لِي وَلِوَالِدَيَّ وَلِلْمُؤْمِنِينَ يَوْمَ يَقُومُ الْحِسَابُ
रब्ब-नग़-फिर ली व लिवालिदय-य वलिल मु’मिनी-न यौ-म यक़ूमुल हिसाब।
ऐ हमारे रब! मुझे, मेरे माँ-बाप को और सब मोमिनों को उस दिन माफ़ फरमा देना जिस दिन हिसाब क़ायम होगा।
(सूरह इब्राहीम: 41)
36. रहमत और हिदायत की दुआ
رَبَّنَا آتِنَا مِن لَّدُنكَ رَحْمَةً وَهَيِّئْ لَنَا مِنْ أَمْرِنَا رَشَدًا
रब्बना आतिना मिन लदुन-क रह़मतन व हय्यिअ् लना मिन अमरिना र-श-दा।
ऐ हमारे रब! हमें अपने पास से रहमत अता फरमा और हमारे काम में हमारे लिए हिदायत का सामान मुहैया फरमा।
(सूरह अल-कहफ़: 10)
37. इल्म में इज़ाफ़े की दुआ
رَّبِّ زِدْنِي عِلْمًا
रब्बी ज़िदनी इल्मा।
ऐ मेरे रब! मेरे इल्म में इज़ाफ़ा फरमा।
(सूरह ता-हा: 114)
38. औलाद और बीवी से आँखों की ठंडक की दुआ
رَبَّنَا هَبْ لَنَا مِنْ أَزْوَاجِنَا وَذُرِّيَّاتِنَا قُرَّةَ أَعْيُنٍ وَاجْعَلْنَا لِلْمُتَّقِينَ إِمَامًا
रब्बना हब लना मिन अज़वाजिना व ज़ुर्रिय्यातिना क़ुर्र-त अअ्युनिन वजअल्ना लिल मुत्तक़ी-न इमामा।
ऐ हमारे रब! हमें हमारी बीवियों और हमारी औलाद से आँखों की ठंडक अता फरमा और हमें परहेज़गारों का इमाम बना।
(सूरह अल-फ़ुरक़ान: 74)
39. ज़ालिमों से निजात की दुआ
رَبَّنَا أَخْرِجْنَا مِنْ هَٰذِهِ الْقَرْيَةِ الظَّالِمِ أَهْلُهَا وَاجْعَل لَّنَا مِن لَّدُنكَ وَلِيًّا وَاجْعَل لَّنَا مِن لَّدُنكَ نَصِيرًا
रब्बना अख़रिजना मिन हाज़िहिल क़रयतिज़-ज़ालिमि अहलुहा वज-अल लना मिन लदुन-क वलिय्यन वज-अल लना मिन लदुन-क नसीरा।
ऐ हमारे रब! हमें इस बस्ती से निकाल दे जिसके बाशिंदे ज़ालिम हैं, और हमारे लिए अपनी तरफ से कोई हिमायती बना दे और हमारे लिए अपनी तरफ से कोई मददगार भेज दे।
(सूरह अन-निसा: 75)
40. शैतान के वसवसों से पनाह
رَّبِّ أَعُوذُ بِكَ مِنْ هَمَزَاتِ الشَّيَاطِينِ وَأَعُوذُ بِكَ رَبِّ أَن يَحْضُرُونِ
रब्बी अऊज़ु बिक मिन ह-म-ज़ातिश-शयातीन, व अऊज़ु बिक रब्बी अन यहज़ुरून।
ऐ मेरे रब! मैं शैतानों के वसवसों से तेरी पनाह मांगता हूँ। और ऐ मेरे रब! मैं तेरी पनाह मांगता हूँ इस बात से कि वो मेरे पास आएं।
(सूरह अल-मु’मिनून: 97-98)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. रब्बना दुआएं क्या हैं?
ये वो दुआएं हैं जो कुरान-ए-पाक में आई हैं और “रब्बना” (ऐ हमारे रब) या “रब्बी” (ऐ मेरे रब) से शुरू होती हैं। ये बहुत जामे और असरदार दुआएं हैं।
Q. क्या इन दुआओं को नमाज़ में पढ़ सकते हैं?
जी हाँ, इन कुरानी दुआओं को फ़र्ज़ और नफिल नमाज़ों में सजदे की हालत में या सलाम फेरने से पहले (अत्तहिय्यात और दरूद के बाद) पढ़ा जा सकता है।
Q. इन दुआओं को याद करने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?
रोज़ाना कुछ दुआओं को उनके तर्जुमे के साथ पढ़ें और समझें। फिर उन्हें अपनी नमाज़ों में और दिन भर उठते-बैठते पढ़ने की आदत बनाएं। इंशाअल्लाह, जल्द ही ये दुआएं याद हो जाएंगी।
नतीजा (Conclusion)
कुरान में मौजूद ये “रब्बना” दुआएं सिर्फ अल्फाज़ नहीं, बल्कि अल्लाह से राब्ता (connection) बनाने का एक खूबसूरत ज़रिया हैं। ये हमें सिखाती हैं कि हमें अल्लाह से क्या, कैसे और किस आदाब से मांगना चाहिए। इन दुआओं को अपनी ज़िन्दगी का हिस्सा बनाकर हम दुनिया और आखिरत दोनों में कामयाबी हासिल कर सकते हैं।
अल्लाह हमें इन मुबारक दुआओं को पढ़ने, समझने और अपनी ज़िन्दगी में शामिल करने की तौफीक अता फरमाए। आमीन।
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