Namaz Prayer Times: अपनी लोकेशन के मुताबिक नमाज़ का वक़्त जानें

Namaz (Salah) Prayer Times: जानिए अपनी जगह के मुताबिक फज्र, ज़ुहर, असर, मगरिब और ईशा का सही वक़्त। विभिन्न कैलकुलेशन मेथड्स और फिकह (हनफी/शाफई) के तरीकों के साथ।

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नमाज़ की अहमियत (Importance of Salah)

नमाज़ (Salah) इस्लाम का दूसरा और सबसे अहम रुकन है। यह दिन में पांच बार, मुकर्रर वक्त पर अदा की जाती है। कुरान में अल्लाह तआला फरमाता है: “बेशक नमाज़ मोमिनों पर मुकर्रर वक्तों में फ़र्ज़ है।” (सूरह निसा: 103)। हमारा यह टूल आपको सूरज की स्थिति के हिसाब से फज्र, ज़ुहर, असर, मगरिब और ईशा का बिल्कुल सही वक्त बताता है।

नमाज़ के औकात कैसे तय होते हैं? (How Prayer Times Are Calculated)

हर नमाज़ का वक्त सूरज की एक खास स्थिति से जुड़ा होता है:

  • फज्र (Fajr): सुबह सादिक से शुरू होकर सूरज निकलने तक।
  • ज़ुहर (Dhuhr): सूरज के ढलने (Zawal) के बाद शुरू होता है।
  • असर (Asr): जब हर चीज़ का साया उसके कद के बराबर (या दोगुना) हो जाए।
  • मगरिब (Maghrib): सूरज डूबने के तुरंत बाद शुरू होता है।
  • ईशा (Isha): जब आसमान से लाली (Twilight) खत्म हो जाए।

अगर आप नमाज़ पढ़ने का सही तरीका सीखना चाहते हैं, तो हमारा यह आर्टिकल ज़रूर पढ़ें: Namaz Ka Tarika (नमाज़ का तरीका)

कैलकुलेशन मेथड (Calculation Methods)

दुनिया भर में नमाज़ के वक्त के लिए अलग-अलग स्टैंडर्ड्स (Methods) इस्तेमाल होते हैं। आप अपनी मस्जिद या इलाके के हिसाब से चुन सकते हैं:

  • Muslim World League: दुनिया के ज़्यादातर हिस्सों में इस्तेमाल होता है।
  • Karachi (University of Islamic Sciences): पाकिस्तान, भारत (India) और बांग्लादेश में आम है।
  • North America (ISNA): अमेरिका और कनाडा के लिए।
  • Umm Al Qura, Makkah: सऊदी अरब में इस्तेमाल होता है।

असर का वक्त (Asr Method - Madhab)

असर की नमाज़ का वक्त इमामों के नज़दीक अलग-अलग है:

  • हनफी (Hanafi): असर तब शुरू होती है जब साया कद का दोगुना हो जाए। (भारत, पाकिस्तान में ज़्यादातर यही चलता है)
  • शाफई (Shafi’i), मालिकी, हम्बली: असर तब शुरू होती है जब साया कद के बराबर हो जाए।

सही वक्त जानने के लिए सेटिंग्स में अपना Method और Madhab सही चुनें।

नमाज़ के लिए तैयारी (Preparation for Salah)

नमाज़ पढ़ने से पहले कुछ चीज़ें ज़रूरी हैं:

  1. पाकी (Cleanliness): बदन, कपड़े और जगह का पाक होना ज़रूरी है।
  2. वुज़ू (Wudu): नमाज़ के लिए वुज़ू करना फ़र्ज़ है। अगर वुज़ू का तरीका नहीं पता, तो यहाँ देखें: Wuzu Ka Tarika (वुज़ू का तरीका)
  3. क़िब्ला (Qibla): नमाज़ काबा (मक्का) की तरफ मुँह करके पढ़ी जाती है। अगर आप सफर में हैं, तो हमारा Qibla Finder Tool इस्तेमाल करें।

वक़्त की पाबंदी के फायदे (Benefits of Praying on Time)

अल्लाह तआला को वो अमल सबसे ज़्यादा पसंद है जो वक़्त पर किया जाए। नमाज़ को उसके अव्वल वक़्त में पढ़ना अफ़ज़ल है।

  • अनुशासन (Discipline): नमाज़ इंसान को वक़्त का पाबंद बनाती है।
  • सुकून (Peace): अल्लाह की याद से दिल को सुकून मिलता है।
  • गुनाहों से बचाव: “बेशक नमाज़ बेहयाई और बुरी बातों से रोकती है।” (सूरह अनकबूत: 45)

नफ़िल नमाज़ें (Voluntary Prayers)

फ़र्ज़ नमाज़ों के अलावा, कुछ नफ़िल नमाज़ें भी बहुत फज़ीलत रखती हैं:

  • तहज्जुद (Tahajjud): यह रात के आखिरी पहर में पढ़ी जाती है। इसका सवाब बहुत ज़्यादा है। तरीका जानें: Tahajjud Namaz Ka Tarika
  • सलात-उल-तस्बीह (Salat-ul-Tasbeeh): यह नमाज़ गुनाहों की माफ़ी के लिए बहुत असरदार है। तरीका जानें: Salat-ul-Tasbeeh Namaz Ka Tarika

इस टूल का इस्तेमाल कैसे करें? (How to Use)

यह टूल इस्तेमाल करना बहुत आसान है। बस नीचे दिए गए स्टेप्स फॉलो करें:

  1. लोकेशन (Location):

    • जब आप पेज पर आएंगे, तो ब्राउज़र आपसे लोकेशन की परमिशन मांग सकता है। ‘Allow’ पर क्लिक करें ताकि यह आपकी जगह का सही वक्त बता सके।
    • अगर आप परमिशन नहीं देना चाहते, तो ऊपर दिए गए सर्च बॉक्स में अपने शहर का नाम (जैसे: Delhi, Mumbai) लिखें और सर्च करें।
  2. वक्त देखें (Check Times):

    • लोकेशन सेट होते ही आपको आज की नमाज़ों (फज्र, ज़ुहर, असर, मगरिब, ईशा) का वक्त दिख जाएगा।
    • ‘Next Prayer’ में आपको अगली नमाज़ के लिए कितना वक्त बचा है, यह भी दिखेगा।
  3. सेटिंग्स बदलें (Settings):

    • अगर वक्त आपकी मस्जिद से मेल नहीं खा रहा, तो ‘Settings’ (⚙️) बटन पर क्लिक करें।
    • Calculation Method: भारत/पाकिस्तान के लिए ‘Karachi’ चुनें।
    • Asr Method: अगर आप हनफी हैं तो ‘Hanafi’ चुनें, वरना ‘Standard’ रहने दें।
  4. पीडीऍफ़ और नोटिफिकेशन (PDF & Notifications):

    • आप पूरे महीने का टाइम टेबल PDF में डाउनलोड कर सकते हैं।
    • घंटी (🔔) के आइकन पर क्लिक करके अज़ान के वक्त नोटिफिकेशन भी चालू कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. नमाज़ का वक़्त रोज़ क्यों बदलता है?
A.

नमाज़ का वक़्त सूरज की स्थिति (Position of Sun) पर निर्भर करता है। चूंकि पृथ्वी सूरज के चारों ओर घूमती है, इसलिए सूरज निकलने और डूबने का वक़्त रोज़ बदलता रहता है, जिससे नमाज़ का वक़्त भी बदलता है।

Q. हनफी और शाफई असर के वक़्त में क्या फर्क है?
A.

हनफी मसलक में असर का वक़्त तब शुरू होता है जब किसी चीज़ का साया उसके कद का दोगुना (2x) हो जाए। जबकि शाफई (और मालिकी, हम्बली) में असर तब शुरू होती है जब साया कद के बराबर (1x) हो जाए।

Q. क्या वक़्त से पहले नमाज़ पढ़ सकते हैं?
A.

नहीं, नमाज़ के लिए वक़्त का होना शर्त है। वक़्त शुरू होने से पहले पढ़ी गई नमाज़ नफिल मानी जाएगी, फ़र्ज़ अदा नहीं होगा।

Q. भारत और पाकिस्तान के लिए कौन सा कैलकुलेशन मेथड सही है?
A.

भारत और पाकिस्तान में आमतौर पर University of Islamic Sciences, Karachi का मेथड इस्तेमाल होता है। आप सेटिंग्स में जाकर इसे चुन सकते हैं।

Q. क्या सफर में नमाज़ का वक़्त बदल जाता है?
A.

जी हाँ, सफर में आपकी लोकेशन बदलती है, इसलिए सूरज निकलने और डूबने का वक़्त भी बदलता है। सफर में आप क़स्र नमाज़ (Qasr Namaz) पढ़ सकते हैं।

Q. अगर नमाज़ कज़ा हो जाए तो क्या करें?
A.

अगर किसी वजह से नमाज़ छूट जाए, तो उसे जल्द से जल्द अदा करना चाहिए। इसे कज़ा नमाज़ कहते हैं। तफसील के लिए पढ़ें: Qaza Namaz Ka Tarika

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