Surah Mursalat in Hindi: सूरह मुरसलात की फजीलत और तर्जुमा
Surah Mursalat in Hindi: जानिए सूरह मुरसलात का हिंदी तर्जुमा और फजीलत। यह सूरह कयामत के दिन, हवाओं की कसम और झुठलाने वालों के अंजाम के बारे में है।

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सूरह मुरसलात (Surah Al-Mursalat) कुरान मजीद की 77वीं सूरह है और यह 29वें पारे की आखिरी सूरह है। “अल-मुरसलात” का मतलब है “भेजी जाने वाली हवाएं” (The Emissaries)।
यह सूरह मक्का में नाज़िल हुई और इसमें 50 आयतें हैं। इस सूरह की खास बात यह है कि इसमें एक आयत “वैलुंय-यौम-इज़िल-लिल-मुकज़्ज़िबीन” (उस दिन झुठलाने वालों के लिए खराबी है) 10 बार दोहराई गई है, जो कयामत के दिन का इनकार करने वालों के लिए सख्त चेतावनी है।
इस आर्टिकल में हम Surah Mursalat in Hindi, इसका तर्जुमा और अहमियत जानेंगे।
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सूरह मुरसलात की अहमियत (Importance of Surah Al-Mursalat)
- कयामत का मंज़र: यह सूरह कयामत के दिन की हौलनाकी बयान करती है, जब तारे बे-नूर हो जाएंगे, आसमान फट जाएगा और पहाड़ उड़ा दिए जाएंगे।
- अल्लाह की कुदरत: इसमें इंसान की पैदाइश (हकीर पानी से) और ज़मीन के निज़ाम का ज़िक्र है, जो अल्लाह की कुदरत की दलील है।
- चेतावनी: इसमें बार-बार झुठलाने वालों को डराया गया है कि अगर वो नहीं माने तो उनका अंजाम बहुत बुरा होगा।
Surah Mursalat in Hindi (Hindi Mein)
बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम
वल-मुरसलाति उर्फ़ा।
(कसम है उन (हवाओं) की जो लगातार भेजी जाती हैं।)फल-आसिफाति अस्फ़ा।
(फिर जो तूफानी होकर चलती हैं।)वन-नाशिराति नश्रा।
(और (बादलों को) खूब फैलाने वाली हैं।)फल-फारिकाति फ़र्क़ा।
(फिर (हक़ और बातिल में) फर्क करने वाली हैं।)फल-मुल्कियाति ज़िक्रा।
(फिर जो नसीहत (वही) लाने वाली हैं।)उज़्रन औ नुज़्रा।
(इल्ज़ाम खत्म करने या डराने के लिए।)इन्नमा तू-अदूना ल-वाक़िअ्।
(बेशक जिसका तुमसे वादा किया जाता है, वो ज़रूर होने वाला है।)फ-इज़न-नुजूमु तुमिसत।
(तो जब तारे बे-नूर कर दिए जाएंगे।)व इज़स-समा-उ फुरिजत।
(और जब आसमान फाड़ दिया जाएगा।)व इज़ल-जिबालु नुसिफत।
(और जब पहाड़ उड़ा दिए जाएंगे।)व इज़र-रुसुलु उक्क़ितत।
(और जब रसूलों का वक़्त मुकर्रर किया जाएगा।)लि-अय्यि यौमिन उज्जिलत।
(किस दिन के लिए (ये काम) मुल्तवी (देर) किए गए थे?)लि-यौमिल-फस्ल।
(फैसले के दिन के लिए।)व मा अदराका मा यौमुल-फस्ल।
(और तुम क्या जानो कि फैसले का दिन क्या है?)वैलुंय-यौम-इज़िल-लिल-मुकज़्ज़िबीन।
(उस दिन झुठलाने वालों के लिए खराबी (हलाकत) है।)अ-लम नुहलिकिल-अव्वलीन।
(क्या हमने पहलों को हलाक नहीं किया?)सुम्मा नुत्बि-उहुमुल-आख़िरीन।
(फिर हम पिछलों को भी उनके पीछे लगा देंगे।)कज़ालिका नफ़-अलु बिल-मुजरिमीन।
(हम मुजरिमों के साथ ऐसा ही किया करते हैं।)वैलुंय-यौम-इज़िल-लिल-मुकज़्ज़िबीन।
(उस दिन झुठलाने वालों के लिए खराबी है।)अ-लम नख़्लुक़्कुम-मिम-मा-इम-महीन।
(क्या हमने तुम्हें एक हकीर (मामूली) पानी से पैदा नहीं किया?)फ-ज-अल्नाहु फी क़रारिम-मकीन।
(फिर हमने उसे एक मज़बूत ठिकाने (रहम) में रखा।)इला क़दरिम-मअ्लूम।
(एक मालूम मुद्दत तक।)फ-क़दरना फ-निअ्मल-क़ादिरून।
(फिर हमने अंदाज़ा मुकर्रर किया, तो हम क्या ही अच्छे कुदरत वाले हैं।)वैलुंय-यौम-इज़िल-लिल-मुकज़्ज़िबीन।
(उस दिन झुठलाने वालों के लिए खराबी है।)अ-लम नज-अलिल-अर्ज़ा किफ़ाता।
(क्या हमने ज़मीन को समेटने वाली नहीं बनाया?)अह्या-अंव-व अम्वाता।
(ज़िन्दों को और मुर्दों को।)व ज-अल्ना फीहा रवासिया शामिख़ातिंव-व अस्कैनाकुम-मा-अन फुराता।
(और हमने उसमें ऊँचे-ऊँचे पहाड़ बनाए और तुम्हें मीठा पानी पिलाया।)वैलुंय-यौम-इज़िल-लिल-मुकज़्ज़िबीन।
(उस दिन झुठलाने वालों के लिए खराबी है।)इन्तलिक़ू इला मा कुन्तुम-बिही तुकज़्ज़िबून।
((कहा जाएगा:) चलो उस चीज़ (जहन्नम) की तरफ जिसे तुम झुठलाते थे।)इन्तलिक़ू इला ज़िल्लिन ज़ी सलासि शु-अब।
(चलो उस साये (धुएं) की तरफ जिसकी तीन शाखाएं हैं।)ला ज़लीलिंव-व ला युग्नी मिनल-लहब।
(न वो साया देने वाला है और न आग की लपट से बचाता है।)इन्नहा तरमी बि-शररिन कल-क़स्र।
(बेशक वो (जहन्नम) महल जैसे (बड़े) अंगारे फेंकती है।)क-अन्नहू जिमालतुन सुफ़्र।
(गोया कि वो पीले ऊंट हैं।)वैलुंय-यौम-इज़िल-लिल-मुकज़्ज़िबीन।
(उस दिन झुठलाने वालों के लिए खराबी है।)हाज़ा यौमु ला यन्तिकून।
(यह वो दिन है कि वो बोल नहीं सकेंगे।)व ला युअ्ज़नु लहुम फ-यअ्तज़िरून।
(और न उन्हें इजाज़त दी जाएगी कि वो उज़्र (बहाना) पेश करें।)वैलुंय-यौम-इज़िल-लिल-मुकज़्ज़िबीन।
(उस दिन झुठलाने वालों के लिए खराबी है।)हाज़ा यौमुल-फस्लि, जमअ्नाकुम वल-अव्वलीन।
(यह फैसले का दिन है, हमने तुम्हें और पहलों को जमा किया है।)फ-इन काना लकुम कैदुन फ-कीदून।
(तो अगर तुम्हारे पास कोई चाल है तो मुझसे चल लो।)वैलुंय-यौम-इज़िल-लिल-मुकज़्ज़िबीन।
(उस दिन झुठलाने वालों के लिए खराबी है।)इन्नल-मुत्तक़ीना फी ज़िलालिंव-व उयून।
(बेशक परहेज़गार सायों और चश्मों में हैं।)व फवाकिहा मिम्मा यश्तहून।
(और उन फलों में जो वो चाहेंगे।)कुलू वशरबू हनी-अम-बिमा कुन्तुम तअ्मलून।
(खाओ और पियो मज़े से, उन आमाल के बदले जो तुम करते थे।)इन्ना कज़ालिका नज्ज़िल-मुहसिनीन।
(बेशक हम नेकी करने वालों को ऐसा ही बदला देते हैं।)वैलुंय-यौम-इज़िल-लिल-मुकज़्ज़िबीन।
(उस दिन झुठलाने वालों के लिए खराबी है।)कुलू व त-मत्तऊ क़लीलन इन्नकुम-मुजरिमून।
((ऐ काफिरो!) तुम खा लो और थोड़ा फायदा उठा लो, बेशक तुम मुजरिम हो।)वैलुंय-यौम-इज़िल-लिल-मुकज़्ज़िबीन।
(उस दिन झुठलाने वालों के लिए खराबी है।)व इज़ा कीला लहुमुर-कऊ ला यरकऊन।
(और जब उनसे कहा जाता है कि रुकू करो (झुको) तो वो रुकू नहीं करते।)वैलुंय-यौम-इज़िल-लिल-मुकज़्ज़िबीन।
(उस दिन झुठलाने वालों के लिए खराबी है।)फ-बि-अय्यि हदीसिम-बअ्दहू युअ्मिनून।
(तो अब इस (कुरान) के बाद वो किस बात पर ईमान लाएंगे?)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. मुरसलात (Mursalat) का क्या मतलब है?
“मुरसलात” का मतलब है “भेजी जाने वाली हवाएं”। अल्लाह ने इस सूरह की शुरुआत में हवाओं की कसम खाई है जो उसके हुक्म से चलती हैं।
Q. इस सूरह में कौन सी आयत बार-बार आई है?
इस सूरह में “वैलुंय-यौम-इज़िल-लिल-मुकज़्ज़िबीन” (उस दिन झुठलाने वालों के लिए खराबी है) आयत 10 बार आई है।
नतीजा (Conclusion)
सूरह मुरसलात हमें कयामत के दिन की सख्ती और अल्लाह की पकड़ से डराती है। यह हमें बताती है कि दुनिया की लज़्ज़तें आरज़ी (Temporary) हैं और असल कामयाबी आखिरत की है।
अल्लाह हमें कुरान पर ईमान लाने और नेक अमल करने की तौफीक दे। आमीन।





