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Iffat Zia
· Namaz · 2 min read

Sana in Hindi - नमाज़ में पढ़ी जाने वाली सना और तर्जुमा

Sana in Hindi (सना): जानिए नमाज़ शुरू करने की दुआ (सना) का हिंदी तर्जुमा, सही उच्चारण और अहमियत। साथ ही जानिए जनाज़े की नमाज़ में पढ़ी जाने वाली सना।

Sana in Hindi - नमाज़ में पढ़ी जाने वाली सना और तर्जुमा

Table of Contents

सना (Sana) वो दुआ है जिसे हम नमाज़ की पहली रकअत में तकबीर-ए-तहरीमा (‘अल्लाहु अकबर’) कहने के बाद पढ़ते हैं। यह अल्लाह तआला की पाकी और तारीफ बयान करने वाले कलिमात हैं।

सना पढ़ना सुन्नत है। इसे इमाम, मुक़्तदी (इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ने वाला) और अकेले नमाज़ पढ़ने वाले, सभी पढ़ते हैं।

इस आर्टिकल में हम Sana in Hindi, इसका हिंदी तर्जुमा, अरबी टेक्स्ट और इंग्लिश ट्रांसलेशन जानेंगे।

ये भी पढ़े: Namaz Ka Tarika in Hindi | नमाज़ पढ़ने का सही तरीका

Sana in Hindi (Translation)

यहाँ नमाज़ में पढ़ी जाने वाली सना का हिंदी उच्चारण (Transliteration) और आसान तर्जुमा दिया गया है।

सुबहानकल्लाहुम्मा व बि-हम्दिका, व तबारकस्मुका, व तआला जद्दुका, व ला इलाहा गैरुक।

हिंदी तर्जुमा (Meaning in Hindi)

(ऐ अल्लाह! तू पाक है और मैं तेरी तारीफ करता हूँ। तेरा नाम बरकत वाला है और तेरी शान बुलंद है। तेरे सिवा कोई इबादत के लायक नहीं।)


Sana in English

जो लोग हिंदी नहीं पढ़ सकते, उनके लिए यहाँ इंग्लिश ट्रांसलिट्रेशन और ट्रांसलेशन दिया गया है:

Subhanakallahumma wa bihamdika, wa tabarakasmuka, wa ta’ala jadduka, wa la ilaha ghairuk.

English Translation

(Glory is to You, O Allah, and praise is to You. Blessed is Your name, and exalted is Your majesty. There is no god but You.)


Sana in Arabic

سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ وَبِحَمْدِكَ، وَتَبَارَكَ اسْمُكَ، وَتَعَالَى جَدُّكَ، وَلَا إِلَهَ غَيْرُكَ


जनाज़े की नमाज़ की सना (Sana for Janaza Prayer)

जनाज़े की नमाज़ में पढ़ी जाने वाली सना में एक छोटा सा फ़र्क़ होता है। उसमें “व जल्ला सनाउका” भी पढ़ा जाता है।

सुबहानकल्लाहुम्मा व बि-हम्दिका, व तबारकस्मुका, व तआला जद्दुका, व जल्ला सनाउका, व ला इलाहा गैरुक।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. सना कब पढ़ी जाती है?
A.

सना नमाज़ की पहली रकअत में, तकबीर-ए-तहरीमा (‘अल्लाहु अकबर’) कहने के फौरन बाद पढ़ी जाती है।

Q. क्या सना पढ़ना फ़र्ज़ है?
A. नहीं, सना पढ़ना फ़र्ज़ या वाजिब नहीं, बल्कि सुन्नत है।
Q. अगर सना पढ़ना भूल जाएं तो क्या करें?
A.

अगर कोई सना पढ़ना भूल जाए और सूरह फातिहा शुरू कर दे, तो उसकी नमाज़ हो जाएगी। इसके लिए सज्दा-ए-सहू की ज़रूरत नहीं है।


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