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Namaz Ki Sunnat in Hindi - नमाज़ की सुन्नतें और तरीका
Namaz Ki Sunnat (नमाज़ की सुन्नतें): जानिए नमाज़ में कितनी सुन्नतें होती हैं? कयाम, रुकू, सज्दा और सलाम की सुन्नतों की पूरी लिस्ट हिंदी में।

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नमाज़ (Salah) में फ़र्ज़ और वाजिब के अलावा कुछ सुन्नतें (Sunnahs) भी होती हैं। सुन्नत वो अमल है जो हमारे प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद (ﷺ) ने किया और हमें करने का हुक्म दिया या पसंद फरमाया।
हालांकि सुन्नत छूट जाने से नमाज़ नहीं टूटती (सज्दा-ए-सहू भी वाजिब नहीं होता), लेकिन जानबूझकर सुन्नत छोड़ने से नमाज़ का सवाब कम हो जाता है और यह नबी (ﷺ) के तरीके के खिलाफ है।
इस आर्टिकल में हम Namaz Ki Sunnat (नमाज़ की सुन्नतें) तफसील से जानेंगे।
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नमाज़ की सुन्नतें (List of Sunnahs in Namaz)
नमाज़ की सुन्नतों को समझने के लिए हम उन्हें अलग-अलग हिस्सों में बांट सकते हैं।
1. कयाम (Qayam) की सुन्नतें
- तकबीर-ए-तहरीमा (शुरुआत) के वक़्त सीधे खड़े होना (सर न झुकाना)।
- मर्दों का दोनों पैरों के बीच लगभग 4 उंगलियों का फासला रखना।
- तकबीर के लिए मर्दों का हाथ कानों तक और औरतों का कंधों तक उठाना।
- हाथ उठाते वक़्त हथेलियां किबला रुख रखना और उंगलियां अपनी हालत पर रखना (न ज्यादा खुली, न बंद)।
- इमाम के ‘अल्लाहु अकबर’ कहने के फौरन बाद मुक्तदी का तकबीर कहना।
- हाथ बांधना: मर्दों का नाभि के नीचे (दाहिना हाथ बाएं हाथ के ऊपर) और औरतों का सीने पर हाथ रखना।
- सना (Sana) पढ़ना।
- तअव्वुज़ (अऊज़ु बिल्लाह…) पढ़ना।
- तस्मिया (बिस्मिल्लाह…) पढ़ना।
- सूरह फातिहा के बाद आहिस्ता से ‘आमीन’ कहना।
2. रुकू (Ruku) की सुन्नतें
- रुकू में जाते और उठते वक़्त ‘अल्लाहु अकबर’ कहना।
- रुकू में दोनों हाथों से घुटनों को मजबूती से पकड़ना (मर्द उंगलियां खुली रखें, औरतें मिलाकर रखें)।
- मर्दों का रुकू में पीठ बिल्कुल सीधी रखना (सर और पीठ एक सीध में)।
- रुकू में कम से कम 3 बार “सुबहान रब्बी-अल अज़ीम” कहना।
3. क़ौमा (Qawma - रुकू से उठना) की सुन्नतें
- रुकू से उठते वक़्त इमाम का “समिअल्लाहु लिमन हमिदह” कहना।
- खड़े होकर “रब्बना लकल हम्द” कहना।
- इत्मीनान से सीधा खड़ा होना।
4. सज्दा (Sajda) की सुन्नतें
- सज्दे में जाते वक़्त ‘अल्लाहु अकबर’ कहना।
- सज्दे में जाने की तरतीब: पहले घुटने, फिर हाथ, फिर नाक, फिर माथा ज़मीन पर रखना।
- सज्दे में चेहरा दोनों हथेलियों के बीच रखना।
- मर्दों का पेट रानों से और बाज़ू बगलों से जुदा रखना (औरतें सिमट कर सज्दा करें)।
- सज्दे में कम से कम 3 बार “सुबहान रब्बी-अल आला” कहना।
- सज्दे से उठते वक़्त पहले माथा, फिर नाक, फिर हाथ, फिर घुटने उठाना।
5. क़ादा (Qaada - बैठना) की सुन्नतें
- मर्दों का बायां पैर बिछाकर उस पर बैठना और दाहिना पैर खड़ा रखना (उंगलियां किबला रुख)।
- औरतों का दोनों पैर दाहिनी तरफ निकालकर ज़मीन पर बैठना।
- हाथों को रानों (Thighs) पर रखना।
- अत्तहियात में शहादत की उंगली से इशारा करना।
- आखिरी क़ादा में दरूद शरीफ पढ़ना।
- दरूद के बाद दुआ-ए-मासूरा पढ़ना।
6. सलाम (Salam) की सुन्नतें
- सलाम फेरते वक़्त पहले दाहिनी (Right) तरफ, फिर बाईं (Left) तरफ चेहरा घुमाना।
- सलाम में फरिश्तों, इमाम और नमाज़ियों की नियत करना।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. अगर नमाज़ में सुन्नत छूट जाए तो क्या करें?
अगर नमाज़ में कोई सुन्नत छूट जाए (जैसे सना पढ़ना या आमीन कहना), तो नमाज़ हो जाती है। इसके लिए सज्दा-ए-सहू की ज़रूरत नहीं होती। लेकिन जानबूझकर छोड़ना अच्छा नहीं है।
Q. क्या सुन्नत-ए-मुअक्कदा छोड़ने से गुनाह होता है?
जी हाँ, सुन्नत-ए-मुअक्कदा (जैसे फज्र की 2 सुन्नत) को बिना किसी उज़्र (मजबूरी) के छोड़ना और इसकी आदत बना लेना गुनाह है।
अल्लाह हमें नमाज़ को उसके तमाम आदाब और सुन्नतों के साथ अदा करने की तौफीक अता फरमाए। आमीन।
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