Islam Ki Achi Baatein: इस्लाम की 5 खूबसूरत बातें जो हर मुसलमान को जाननी चाहिए
Islam Ki Achi Baatein: इस्लाम सिर्फ इबादत का नाम नहीं, बल्कि जीने का एक मुकम्मल तरीका है। जानिए इस्लाम की वो 5 अच्छी बातें जो इंसानियत, मोहब्बत और भाईचारे का पैगाम देती हैं।

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दुनिया में इस्लाम मज़हब को लेकर लोगों का एक अलग ही नजरिया है। अक्सर इस्लाम को सख्त मज़हब के तौर पर पेश किया जाता है, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। इस्लाम (Islam) का मतलब ही “सलामती” और “शांति” है।
इस्लाम सिर्फ नमाज़-रोज़े का नाम नहीं है, बल्कि यह ज़िंदगी गुज़ारने का एक बेहतरीन तरीका (Way of Life) है। जो मज़हब पानी की एक बूँद भी जाया करने से रोकता हो, वो किसी का खून बहाने की इजाज़त कैसे दे सकता है?
इस आर्टिकल में हम जानेंगे Islam Ki Achi Baatein जो न सिर्फ मुसलमानों के लिए, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए रहमत हैं।
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1. सलाम का रिवाज (Spreading Peace)
इस्लाम की सबसे खूबसूरत बात यह है कि जब दो लोग मिलते हैं, तो एक-दूसरे के लिए सलामती की दुआ करते हैं। नबी करीम (ﷺ) ने फरमाया: “तुम जन्नत में दाखिल नहीं होगे जब तक ईमान न लाओ, और मोमिन नहीं होगे जब तक आपस में मोहब्बत न करो। क्या मैं तुम्हें ऐसी चीज़ न बताऊँ जिससे आपस में मोहब्बत बढ़े? अपने दरमियान सलाम को आम करो।” (सहीह मुस्लिम)
इस्लाम सिखाता है कि चाहे आप किसी को जानते हों या न जानते हों, हर मुसलमान को सलाम करें। यह ऊंच-नीच और अमीरी-गरीबी के फर्क को मिटाता है।
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2. इल्म हासिल करना (Seeking Knowledge)
इस्लाम में इल्म (Knowledge) हासिल करना हर मुसलमान मर्द और औरत पर फ़र्ज़ है। कुरान की सबसे पहली आयत ही “इक़रा” (पढ़ो) से शुरू हुई।
हदीस में है: “इल्म का हासिल करना हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है।” (इब्न माजा)
इस्लाम सिर्फ दीनी इल्म नहीं, बल्कि दुनियावी इल्म (Science, Maths, etc.) सीखने की भी हौसला-अफ़ज़ाई करता है ताकि इंसान दुनिया में तरक्की कर सके और अल्लाह की मखलूक की खिदमत कर सके।
3. कुरान की तिलावत (Recitation of Quran)
कुरान मजीद अल्लाह का कलाम है जो दिलों को सुकून देता है। अल्लाह फरमाता है: “जब कुरान पढ़ा जाए तो उसे गौर से सुनो और खामोश रहो ताकि तुम पर रहम किया जाए।” (सूरह आराफ: 204)
कुरान सिर्फ पढ़ने की किताब नहीं, बल्कि समझने और अमल करने की किताब है। जो इसे पढ़ता है और इस पर अमल करता है, अल्लाह उसे दुनिया और आखिरत दोनों में इज़्ज़त देता है।
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4. माँ-बाप का मकाम (Respect for Parents)
इस्लाम में अल्लाह की इबादत के बाद सबसे बड़ा दर्जा माँ-बाप (Parents) का है। कुरान में अल्लाह फरमाता है: “और तुम्हारे रब ने फैसला कर दिया है कि उसके सिवा किसी की इबादत न करो और माँ-बाप के साथ अच्छा सुलूक करो। अगर वो बुढ़ापे को पहुँच जाएं तो उन्हें ‘उफ़’ तक न कहो और न उन्हें झिड़को, बल्कि उनसे इज़्ज़त से बात करो।” (सूरह बनी इसराइल: 23)
हदीस में आता है कि “जन्नत माँ के कदमों के नीचे है” और “बाप जन्नत का बीच वाला दरवाज़ा है”। इस्लाम बुज़ुर्गों की इज़्ज़त और खिदमत को जन्नत में जाने का जरिया बताता है।
5. पड़ोसियों और गरीबों का हक़
इस्लाम खुदगर्जी नहीं सिखाता। हदीस में है: “वो शख्स मोमिन नहीं जो खुद पेट भरकर सोए और उसका पड़ोसी भूखा हो।”
इस्लाम में ज़कात (Zakat) और सदका (Sadaqah) का निज़ाम है ताकि समाज में कोई गरीब भूखा न रहे। यह अमीरों के माल को पाक करता है और गरीबों की मदद करता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. क्या इस्लाम सिर्फ मुसलमानों के लिए है?
नहीं, इस्लाम पूरी इंसानियत के लिए है। हमारे नबी (ﷺ) को “रहमतुल-लिल-आलमीन” (सारे जहानों के लिए रहमत) बनाकर भेजा गया था। इस्लाम की अच्छी बातें हर इंसान के लिए फायदेमंद हैं।
Q. इस्लाम में औरतों का क्या मकाम है?
इस्लाम ने औरतों को बहुत ऊँचा मकाम दिया है। बेटी को रहमत, बीवी को घर की मलिका और माँ के कदमों तले जन्नत बताया है। इस्लाम ने औरतों को विरासत (Property) में हक़ दिया है जो पहले किसी मज़हब में नहीं था।
नतीजा (Conclusion)
इस्लाम एक अमन और मोहब्बत का दीन है। इसकी तालीमात (Teachings) पर अमल करने से न सिर्फ हमारी आखिरत संवरती है, बल्कि दुनिया भी जन्नत का नमूना बन सकती है। हमें चाहिए कि हम इस्लाम की इन अच्छी बातों को अपनी ज़िंदगी में उतारें।
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