Aulad Hone Ki Dua: औलाद (बच्चा) पाने की कुरानी दुआएं
Aulad Hone Ki Dua: औलाद पाने के लिए कुरान में बताई गई दुआएं और सही तरीका जानें। ये दुआएं हज़रत ज़करिया और इब्राहिम (अ.स.) ने मांगी थीं।

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औलाद अल्लाह तआला की तरफ से एक बहुत बड़ी नेमत और अमानत है। हर शादीशुदा जोड़ा नेक और सालेह औलाद की तमन्ना रखता है। लेकिन कई बार अल्लाह की तरफ से आज़माइश होती है और औलाद होने में देर होती है।
ऐसे में मायूस होने या गलत रास्तों पर जाने के बजाय हमें अल्लाह की तरफ रुजू करना चाहिए। कुरान मजीद में अल्लाह ने खुद हमें Aulad Hone Ki Dua सिखाई है, जो नबियों ने मांगी और अल्लाह ने उन्हें कुबूल फरमाया।
इस आर्टिकल में हम औलाद पाने की कुरानी दुआएं, दुआ करने का सही तरीका और उन गलतियों के बारे में जानेंगे जिनसे बचना ज़रूरी है।
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औलाद के लिए कुरान में बताई गई दुआएं
कुरान में कई नबियों का ज़िक्र है जिन्हें बुढ़ापे में औलाद मिली। उनकी दुआएं हमारे लिए बेहतरीन रहनुमाई हैं।
1. हज़रत ज़करिया (अ.स.) की दुआ
हज़रत ज़करिया (अलैहिस्सलाम) बूढ़े हो चुके थे और उनकी बीवी भी बांझ थीं, तब उन्होंने अल्लाह से यह दुआ की:
दुआ (अरबी): رَبِّ هَبْ لِي مِن لَّدُنكَ ذُرِّيَّةً طَيِّبَةً ۖ إِنَّكَ سَمِيعُ الدُّعَاءِ
हिंदी उच्चारण: “रब्बी हब ली मिन लदुन-क ज़ुर्रिय-यतन तय्यि-बतन, इन्न-क समी-उद-दुआ।”
तर्जुमा: “ऐ मेरे रब! मुझे अपनी तरफ से पाकीज़ा (नेक) औलाद अता फरमा, बेशक तू ही दुआ का सुनने वाला है।” (सूरह आल-इमरान: 38)
2. हज़रत ज़करिया (अ.स.) की दूसरी दुआ
दुआ (अरबी): رَبِّ لَا تَذَرْنِي فَرْدًا وَأَنتَ خَيْرُ الْوَارِثِينَ
हिंदी उच्चारण: “रब्बी ला त-ज़रनी फरदंव-व अं-त खैरुल-वारिसीन।”
तर्जुमा: “ऐ मेरे रब! मुझे अकेला न छोड़, और तू ही सबसे बेहतर वारिस है।” (सूरह अल-अंबिया: 89)
3. हज़रत इब्राहिम (अ.स.) की दुआ
दुआ (अरबी): رَبِّ هَبْ لِي مِنَ الصَّالِحِينَ
हिंदी उच्चारण: “रब्बी हब ली मिनस-सालिहीन।”
तर्जुमा: “ऐ मेरे रब! मुझे नेक औलाद अता फरमा।” (सूरह अस-साफ्फात: 100)
इस्तिगफार (Istighfar) की ताकत: औलाद पाने का रूहानी नुस्खा
कुरान मजीद में अल्लाह तआला ने हज़रत नूह (अ.स.) के ज़रिए बताया है कि इस्तिगफार (माफ़ी मांगने) से औलाद और माल में बरकत होती है।
सूरह नूह में इरशाद है: “अपने रब से माफ़ी मांगो, बेशक वो बड़ा माफ़ करने वाला है। वो तुम पर आसमान से खूब बारिश बरसाएगा। और तुम्हारे माल और औलाद में तरक्की देगा…” (सूरह नूह: 10-12)
इसलिए चलते-फिरते, उठते-बैठते कसरत से “अस्तगफिरुल्लाह” (Astaghfirullah) पढ़ें। यह बांझपन और हर परेशानी का बेहतरीन इलाज है।
अल्लाह के नामों (Asma-ul-Husna) से दुआ
अल्लाह के कुछ नाम (Asma-ul-Husna) ऐसे हैं जिनका विर्द करने से अल्लाह खुश होता है और मुरादें पूरी करता है। आप इन नामों को हर नमाज़ के बाद पढ़ सकते हैं:
- या खालिकु (Ya Khaliqu): ऐ पैदा करने वाले।
- या मुसव्विरु (Ya Musawwiru): ऐ सूरत (शक्ल) बनाने वाले।
- या वहाबु (Ya Wahhabu): ऐ (बेशुमार) देने वाले।
इन नामों को पढ़कर अल्लाह से रो-रो कर दुआ मांगें: “ऐ मुसव्विर! मेरे रहम (Womb) में एक नेक सूरत बना दे।“
औलाद के लिए दुआ कैसे करें?
- सच्चे दिल से तौबा: पहले अपने गुनाहों की माफ़ी मांगें। सलात-उत-तौबा पढ़ना बहुत फायदेमंद है।
- नमाज़ की पाबंदी: 5 वक़्त की नमाज़ पाबंदी से अदा करें।
- दुआ के औकात: तहज्जुद के वक़्त, अज़ान और इकामत के बीच, और सज्दे में दुआ करें।
- कसरत से इस्तिगफार: “अस्तगफिरुल्लाह” का विर्द करते रहें।
- सब्र और यकीन: अल्लाह की रहमत से मायूस न हों और यकीन रखें कि वो आपकी दुआ ज़रूर कुबूल करेगा।
- सदका (Charity): दुआ से पहले कुछ सदका करें, क्योंकि सदका बलाओं को टालता है और दुआ की कुबूलियत का जरिया है।
हमबिस्तरी (Sohbat) की दुआ: नेक औलाद के लिए ज़रूरी
औलाद के लिए सिर्फ बाद में दुआ करना काफी नहीं है, बल्कि मियां-बीवी के मिलाप (Intercourse) के वक़्त की दुआ भी बहुत अहमियत रखती है।
नबी करीम (ﷺ) ने फरमाया: “जब तुम में से कोई अपनी बीवी के पास आए (हमबिस्तरी करे), तो यह दुआ पढ़े। अगर उस मिलाप से अल्लाह ने औलाद मुकद्दर की, तो शैतान उसे कभी नुकसान नहीं पहुँचा सकेगा।” (बुखारी)
दुआ (अरबी): بِسْمِ اللَّهِ ، اللَّهُمَّ جَنِّبْنَا الشَّيْطَانَ ، وَجَنِّبِ الشَّيْطَانَ مَا رَزَقْتَنَا
हिंदी उच्चारण: “बिस्मिल्लाहि, अल्लाहुम्मा जन्निब-नश-शैताना, व जन्निबिश-शैताना मा रज़क़-तना”
तर्जुमा: “अल्लाह के नाम से। ऐ अल्लाह! हमें शैतान से दूर रख और जो औलाद तू हमें अता फरमाए, उसे भी शैतान से दूर रख।“
इन गलतियों और शिर्क से बचें
औलाद की ख्वाहिश में कुछ लोग ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जो उनके ईमान को खतरे में डाल देती हैं:
- गैर-अल्लाह से मांगना: किसी पीर, फकीर, बाबा या मज़ार पर जाकर औलाद मांगना शिर्क है, जो सबसे बड़ा गुनाह है। देने वाली ज़ात सिर्फ अल्लाह की है।
- तावीज़ और टोटके: नाजायज़ तावीज़, धागे या अजीब-ओ-गरीब टोटकों पर यकीन करना गुमराही है।
- मायूसी: अल्लाह की रहमत से मायूस होना कुफ्र है। हमेशा अच्छी उम्मीद रखें।
- ढोंगी बाबाओं से खतरा: कभी-कभी ससुराल वाले औलाद के लिए बहू को किसी बाबा या पीर के पास भेजते हैं। कई बार ये ढोंगी बाबा इलाज के बहाने औरतों के साथ गलत काम (Zina) करते हैं जिससे वो प्रेग्नेंट हो जाती हैं। यह सरासर हराम है और बहुत बड़ा धोखा है। याद रखें, औलाद देने वाला सिर्फ अल्लाह है।
याद रखें: अगर कोई मेडिकल प्रॉब्लम है, तो डॉक्टर से इलाज कराना सुन्नत है। इलाज के साथ-साथ अल्लाह से दुआ करते रहें।
सिर्फ औरत ज़िम्मेदार नहीं: मर्दों की जांच भी ज़रूरी है
हमारे समाज में एक बहुत बड़ी गलतफहमी यह है कि अगर औलाद नहीं हो रही, तो सारी कमी औरत में ही होगी। अक्सर देखा गया है कि सिर्फ औरत का इलाज करवाया जाता है, उसे तरह-तरह की दवाइयां खिलाई जाती हैं, जबकि मर्द अपनी जांच (Test) करवाने से कतराते हैं।
मेडिकल साइंस के मुताबिक, बांझपन (Infertility) की वजह 40-50% मामलों में मर्दों के अंदर कमी (जैसे स्पर्म काउंट कम होना) होती है।
इस्लामी और अक्ली बात:
- इंसाफ: बिना जांच के औरत को कसूरवार ठहराना और उसे ताने देना ज़ुल्म है।
- इलाज: मर्द को भी अपनी जांच करवानी चाहिए। अगर कमी मर्द में है, तो उसका इलाज कराएं।
- दूसरी शादी: कुछ लोग बिना अपनी जांच कराए, औलाद की खातिर दूसरी शादी कर लेते हैं। अगर कमी मर्द में हुई, तो दूसरी बीवी से भी औलाद नहीं होगी और यह उस औरत की ज़िंदगी खराब करने जैसा होगा।
इसलिए, दोनों (मियां-बीवी) को साथ में डॉक्टर को दिखाना चाहिए और इलाज कराना चाहिए।
तिब्ब-ए-नबवी (Tib-e-Nabawi) से मदद
दुआओं और डॉक्टरी इलाज के साथ-साथ अच्छी गिज़ा (Diet) भी ज़रूरी है। तिब्ब-ए-नबवी में कुछ चीज़ें सेहत और कुव्वत के लिए बेहतरीन बताई गई हैं:
- खजूर (Dates): खजूर, खास तौर पर ‘अजवा खजूर’ खाना सेहत के लिए बहुत मुफीद है।
- शहद (Honey): अल्लाह ने शहद में शिफा रखी है। इसे रोज़ाना इस्तेमाल करें।
- कलौंजी (Black Seed): हदीस में है कि कलौंजी में मौत के सिवा हर बीमारी की शिफा है।
- जैतून (Olive): जैतून का तेल और फल दोनों सेहत के लिए फायदेमंद हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. क्या बेटा होने की कोई खास दुआ है?
इस्लाम में बेटा या बेटी की कोई खास दुआ नहीं है। अल्लाह से हमेशा नेक और सालेह औलाद की दुआ करनी चाहिए, चाहे वो बेटा हो या बेटी। अल्लाह जिसे चाहता है बेटा देता है और जिसे चाहता है बेटी।
Q. अगर दुआ के बाद भी औलाद न हो तो क्या करें?
अगर दुआ और इलाज के बाद भी औलाद नहीं हो रही है, तो सब्र करें और इसे अल्लाह की मर्ज़ी समझकर कुबूल करें। हो सकता है इसी में आपके लिए कोई बेहतरी हो। अल्लाह की रहमत से कभी मायूस न हों।
Q. क्या वज़ीफ़ा करना जायज़ है?
कुरान और हदीस से साबित दुआएं पढ़ना ही सबसे बेहतरीन वज़ीफ़ा है। खुद से बनाए गए या किसी जाहिल पीर के बताए हुए वज़ीफों से बचना चाहिए, क्योंकि उनमें शिर्किया अलफ़ाज़ हो सकते हैं।
नतीजा (Conclusion)
औलाद एक अज़ीम नेमत है और इसे मांगने का हक़ सिर्फ अल्लाह को है। ऊपर बताई गई कुरानी दुआओं को अपनी नमाज़ों और आम औकात में पढ़ते रहें। यकीन रखें कि अल्लाह आपकी पुकार ज़रूर सुनेगा।
अल्लाह हम सबको नेक और सालेह औलाद से नवाज़े। आमीन।





