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Iffat Zia
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Atayat in Hindi - अत्तहियात (तशह्हुद) हिंदी, अरबी और इंग्लिश में

Atayat in Hindi (अत्तहियात): नमाज़ में पढ़ी जाने वाली दुआ (तशह्हुद)। जानिए इसका हिंदी तर्जुमा, सही उच्चारण और मेराज के वाकये से इसका ताल्लुक।

Atayat in Hindi - अत्तहियात (तशह्हुद) हिंदी, अरबी और इंग्लिश में

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अत्तहियात (Atayat), जिसे तशह्हुद (Tashahhud) भी कहा जाता है, नमाज़ का एक बहुत अहम हिस्सा है। इसे नमाज़ की दूसरी और आखिरी रकअत में बैठकर (क़ादा में) पढ़ा जाता है।

कहा जाता है कि अत्तहियात के अल्फाज़ उस बातचीत का हिस्सा हैं जो शब-ए-मेराज (Miraj) की रात अल्लाह तआला और हमारे प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के दरमियान हुई थी।

इस आर्टिकल में हम Atayat in Hindi, इसका हिंदी तर्जुमा, अरबी टेक्स्ट और इंग्लिश ट्रांसलेशन जानेंगे।

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Atayat in Hindi (Tashahhud)

यहाँ अत्तहियात का हिंदी उच्चारण (Transliteration) और आसान तर्जुमा दिया गया है।

बिस्मिल्ला-हिर्रहमा-निर्रहीम

अत्तहिय्यातु लिल्लाहि वस्सलवातु वत्तय्यिबातु, अस्सलामु अलैका अय्युहन-नबिय्यु व रहमतुल्लाहि व बरकातुहू, अस्सलामु अलैना व अला इबादिल्लाहिस-सालिहीन।

(अश-हदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाहु व अश-हदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुहू)

हिंदी तर्जुमा (Meaning in Hindi)

(तमाम ज़बानी, बदनी और माली इबादतें अल्लाह ही के लिए हैं। ऐ नबी! आप पर सलाम हो और अल्लाह की रहमत और उसकी बरकतें हों। हम पर और अल्लाह के नेक बंदों पर सलाम हो।

मैं गवाही देता हूं कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद (इबादत के लायक) नहीं और मैं गवाही देता हूं कि मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) उसके बंदे और रसूल हैं।)

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Atayat in English

जो लोग हिंदी नहीं पढ़ सकते, उनके लिए यहाँ इंग्लिश ट्रांसलिट्रेशन और ट्रांसलेशन दिया गया है:

Attahiyyatu Lillahi was-salawatu wat-tayyibatu, As-salamu ‘alayka ayyuhan-Nabiyyu wa rahmatullahi wa barakatuhu, As-salamu ‘alayna wa ‘ala ‘ibadillahis-saliheen.

Ash-hadu alla ilaha illallahu wa ash-hadu anna Muhammadan ‘abduhu wa rasuluhu.

English Translation

(All compliments, prayers and pure words are due to Allah. Peace be upon you, O Prophet, and the mercy of Allah and His blessings. Peace be upon us and on the righteous slaves of Allah. I bear witness that there is no God but Allah, and I bear witness that Muhammad is His slave and His Messenger.)

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Atayat in Arabic

التَّحِيَّاتُ لِلَّهِ وَالصَّلَوَاتُ وَالطَّيِّبَاتُ، السَّلَامُ عَلَيْكَ أَيُّهَا النَّبِيُّ وَرَحْمَةُ اللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ، السَّلَامُ عَلَيْنَا وَعَلَى عِبَادِ اللَّهِ الصَّالِحِينَ، أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ


अत्तहियात की फजीलत और मेराज का वाकया

रिवायतों में आता है कि जब नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) मेराज पर तशरीफ़ ले गए और अल्लाह के हुज़ूर हाज़िर हुए, तो आपने अल्लाह की शान में कहा: “अत्तहिय्यातु लिल्लाहि वस्सलवातु वत्तय्यिबात” (तमाम इबादतें अल्लाह के लिए हैं)।

इसके जवाब में अल्लाह तआला ने फरमाया: “अस्सलामु अलैका अय्युहन-नबिय्यु…” (ऐ नबी आप पर सलाम हो…)।

नबी (ﷺ) ने अपनी उम्मत को याद रखते हुए फरमाया: “अस्सलामु अलैना व अला इबादिल्लाहिस-सालिहीन” (हम पर और अल्लाह के नेक बंदों पर सलाम हो)।

यह सुनकर फरिश्तों ने गवाही दी: “अश-हदु अल्ला इलाहा…”

यही मुकद्दस कलिमात हम हर नमाज़ में पढ़ते हैं।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. अत्तहियात कब पढ़ी जाती है?
A.

अत्तहियात (तशह्हुद) नमाज़ की दूसरी रकअत और आखिरी रकअत में बैठकर (क़ादा में) पढ़ी जाती है।

Q. अत्तहियात में उंगली कब उठानी चाहिए?
A.

जब आप “अश-हदु अल्ला इलाहा” पर पहुँचें तो शहादत की उंगली उठाएं और “इल्लल्लाहु” पर गिरा दें।

Q. क्या अत्तहियात के बिना नमाज़ हो जाती है?
A.

नहीं, आखिरी क़ादा में अत्तहियात पढ़ना वाजिब है। अगर जानबूझकर छोड़ी तो नमाज़ नहीं होगी, और अगर भूल गए तो सज्दा-ए-सहू करना होगा।


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