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Iffat Zia
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Astaghfirullah Dua in Hindi - अस्तगफिरुल्लाह दुआ हिंदी तर्जुमा और फजीलत

Astaghfirullah Dua in Hindi (अस्तगफिरुल्लाह): जानिए अस्तगफ़ार की दुआ, हिंदी तर्जुमा और पढ़ने की फजीलतें। गुनाहों की माफ़ी और रिज़्क में बरकत का बेहतरीन वजीफा।

Astaghfirullah Dua in Hindi - अस्तगफिरुल्लाह दुआ हिंदी तर्जुमा और फजीलत

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अस्तगफिरुल्लाह (Astaghfirullah) एक ऐसा कलिमा है जो न सिर्फ गुनाहों को मिटाता है, बल्कि ज़िन्दगी में खुशहाली और बरकत भी लाता है। इंसान खता का पुतला है, और अल्लाह माफ़ करने वाला है।

जब हम सच्चे दिल से Astaghfirullah Dua पढ़ते हैं, तो अल्लाह न सिर्फ हमारे गुनाह माफ़ करता है, बल्कि हमें ऐसी जगह से रिज़्क (रोज़ी) देता है जहाँ से हमें गुमान भी नहीं होता।

इस आर्टिकल में हम Astaghfirullah Dua in Hindi, इसका हिंदी तर्जुमा, सय्यिदुल इस्तिग़फ़ार और इसके पढ़ने की फजीलत (Benefits) जानेंगे।

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Astaghfirullah Meaning in Hindi

अस्तगफिरुल्लाह (Astaghfirullah) का मतलब है:

“मैं अल्लाह से माफ़ी मांगता हूँ।”

यह तौबा का सबसे आसान और बेहतरीन तरीका है।


Astaghfirullah Dua in Hindi (अस्तगफ़ार की दुआएं)

हदीस में अस्तगफ़ार के कई तरीके और दुआएं बताई गई हैं। यहाँ कुछ मशहूर दुआएं दी गई हैं:

1. छोटी अस्तगफ़ार (Short Istighfar)

अस्तगफिरुल्लाह (Astaghfirullah) या अस्तगफिरुल्लाह रब्बी (Astaghfirullah Rabbi)

2. गुनाहों की माफ़ी की दुआ (Powerful Dua)

यह दुआ हदीस में बहुत फजीलत रखती है:

अस्तगफिरुल्लाह-हल्लज़ी ला इलाहा इल्ला हुवल हय्युल-कय्यूम व अतुबू इलैह

तर्जुमा: मैं अल्लाह से माफ़ी मांगता हूँ जिसके सिवा कोई माबूद नहीं, जो ज़िंदा है और सबको थामने वाला है, और मैं उसी की तरफ तौबा करता हूँ।

3. सय्यिदुल इस्तिग़फ़ार (Sayyidul Istighfar)

यह तौबा की सबसे अफ़ज़ल दुआ है। नबी करीम (ﷺ) ने फरमाया कि जो शख्स यकीन के साथ दिन में इसे पढ़े और शाम होने से पहले मर जाए, वो जन्नत में जाएगा।

अल्लाहुम्मा अंता रब्बी, ला इलाहा इल्ला अंता, खलकतनी व अना अब्दुक, व अना अला अह्दिका व वअदिका मस्त-तअतु, अऊजु बिका मिन शररि मा सनअतु, अबूउ लका बिनिअ-मतिका अलैया व अबूउ बिज़म्बी, फग्फिर ली फ़ इन्नहू ला यग्फिरुज़-ज़ुनूबा इल्ला अंता।

तर्जुमा: ऐ अल्लाह! तू मेरा रब है, तेरे सिवा कोई माबूद नहीं। तूने मुझे पैदा किया और मैं तेरा बंदा हूँ। मैं अपनी ताक़त के मुताबिक़ तुझसे किये हुए वादे पर क़ायम हूँ। मैं अपनी बुरी हरकतों के शर से तेरी पनाह मांगता हूँ। मैं तेरे एहसानों का इकरार करता हूँ और अपने गुनाहों का एतराफ़ करता हूँ। मुझे माफ़ कर दे, क्योंकि तेरे सिवा कोई गुनाहों को माफ़ करने वाला नहीं।

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अस्तगफ़ार पढ़ने के फायदे (Benefits of Astaghfar)

अस्तगफिरुल्लाह पढ़ने के बेशुमार फायदे हैं, जिनमें से कुछ ये हैं:

  1. गुनाहों की माफ़ी: अल्लाह तआला तौबा करने वालों को पसंद करता है और उनके गुनाह माफ़ कर देता है।
  2. रिज़्क में बरकत: हदीस में है कि जो शख्स अस्तगफ़ार को लाज़िम पकड़ ले (कसरत से पढ़े), अल्लाह उसे ऐसी जगह से रिज़्क देता है जहाँ से उसे गुमान भी नहीं होता।
  3. परेशानियों से निजात: यह हर गम और परेशानी का इलाज है।
  4. बारिश और औलाद: सूरह नूह में अल्लाह ने फरमाया कि अस्तगफ़ार करने से बारिश होती है और माल व औलाद में बरकत होती है।
  5. दिल का सुकून: इससे दिल का बोझ हल्का होता है और रूहानी सुकून मिलता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. अस्तगफिरुल्लाह कितनी बार पढ़ना चाहिए?
A.

नबी करीम (ﷺ) दिन में 70 या 100 बार अस्तगफ़ार किया करते थे। हमें भी कसरत से, कम से कम 100 बार रोज़ाना पढ़ना चाहिए।

Q. सय्यिदुल इस्तिग़फ़ार कब पढ़ना चाहिए?
A. इसे सुबह (फज्र के बाद) और शाम (असर/मगरिब के बाद) पढ़ना सबसे बेहतर है।
Q. क्या अस्तगफ़ार से दुआ क़बूल होती है?
A. जी हाँ, जब गुनाह धुल जाते हैं तो दुआएं जल्दी क़बूल होती हैं।

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