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Iffat Zia
· Akhlaq · 3 min read

Allah Ki Rehmat in Hindi - अल्लाह की रहमत और मगफिरत की हदीस

Allah Ki Rehmat (अल्लाह की रहमत): जानिए अल्लाह की रहमत कितनी वसी (विशाल) है। कुरान और हदीस की रौशनी में तौबा और मगफिरत की अहमियत और अल्लाह की रहमत हासिल करने के तरीके।

Allah Ki Rehmat in Hindi - अल्लाह की रहमत और मगफिरत की हदीस

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अल्लाह की रहमत (Allah Ki Rehmat) इतनी वसी (विशाल) है कि वह हर चीज़ पर छाई हुई है। वह अपने बंदों से 70 माँओं से ज़्यादा मोहब्बत करता है और हमेशा उन्हें माफ़ करने के बहाने ढूंढता है।

एक हदीस-ए-कुदसी में अल्लाह तआला फरमाता है: “मेरी रहमत मेरे गज़ब (गुस्से) पर हावी है।” (सहीह बुखारी)

इसका मतलब है कि अल्लाह की सिफत ‘रहमान’ और ‘रहीम’ उसकी सिफत ‘कहार’ और ‘जब्बार’ पर गालिब है। इस आर्टिकल में हम कुरान और हदीस की रौशनी में अल्लाह की रहमत और मगफिरत की वुसअत (विशालता) को जानेंगे।

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अल्लाह की रहमत से मायूस न हों

शैतान इंसान को उसके गुनाहों की कसरत दिखाकर अल्लाह की रहमत से मायूस करता है। लेकिन अल्लाह ने कुरान में साफ फरमा दिया है:

“कह दो: ऐ मेरे बंदो! जिन्होंने अपनी जानों पर ज़्यादती की है, अल्लाह की रहमत से मायूस न हो। बेशक अल्लाह सारे गुनाह बख्श देता है, क्योंकि वह बड़ा बख्शने वाला, निहायत रहम करने वाला है।” (सूरह ज़ुमर: 53)

100 क़त्ल करने वाले की मगफिरत (हदीस)

अल्लाह की रहमत की वुसअत का अंदाज़ा इस मशहूर हदीस से लगाया जा सकता है: बनी इसराइल में एक शख्स था जिसने 99 क़त्ल किए थे। फिर उसे तौबा का ख्याल आया। वह एक आलिम के पास गया और पूछा कि क्या मेरी तौबा कबूल हो सकती है? आलिम ने कहा, “तेरे और तौबा के बीच कौन आ सकता है? तुम फलां बस्ती में चले जाओ, वहां नेक लोग रहते हैं।”

वह शख्स उस बस्ती की तरफ चल पड़ा, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। अब रहमत और अज़ाब के फरिश्तों में इख्तिलाफ हुआ। अल्लाह ने हुक्म दिया कि दोनों बस्तियों से दूरी नापो। वह नेक लोगों की बस्ती के ज़्यादा करीब पाया गया, तो रहमत के फरिश्तों ने उसकी रूह कब्ज़ की और अल्लाह ने उसे माफ़ कर दिया। (सहीह बुखारी, सहीह मुस्लिम)

अल्लाह की रहमत कैसे हासिल करें?

  1. तौबा और इस्तिगफार: अपने गुनाहों पर शर्मिंदा होकर सच्ची तौबा करना।
  2. दूसरों पर रहम करना: हदीस में है, “जो ज़मीन वालों पर रहम करता है, आसमान वाला (अल्लाह) उस पर रहम करता है।”
  3. अल्लाह से अच्छी उम्मीद रखना: हमेशा यह यकीन रखना कि अल्लाह मुझे ज़रूर माफ़ करेगा।
  4. इबादत और नेक काम: नमाज़, रोज़ा, सदका और दूसरे नेक काम अल्लाह की रहमत को खींचते हैं।
  5. दुआ करना: अल्लाह से उसकी रहमत और मगफिरत मांगते रहना।

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अल्लाह की रहमत की दुआ (Dua for Mercy)

कुरान में अल्लाह की रहमत मांगने की एक बहुत प्यारी दुआ है:

“رَبَّنَا ظَلَمْنَا أَنفُسَنَا وَإِن لَّمْ تَغْفِرْ لَنَا وَتَرْحَمْنَا لَنَكُونَنَّ مِنَ الْخَاسِرِينَ”

“रब्बना ज़लमना अनफुसना व इल्लम् तगफिर लना व तरहमना ल-नकूनन्ना मिनल खासिरीन”

(ऐ हमारे रब! हमने अपनी जानों पर जुल्म किया, और अगर तूने हमें माफ़ न किया और हम पर रहम न किया, तो हम ज़रूर घाटा उठाने वालों में से हो जाएंगे।)


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. अल्लाह की रहमत का क्या मतलब है?
A.

अल्लाह की रहमत का मतलब है उसकी मेहरबानी, शफकत, बख्शिश और करम जो उसकी तमाम मखलूक पर है।

Q. क्या बड़े से बड़ा गुनाह भी माफ़ हो सकता है?
A.

जी हाँ, अगर इंसान शिर्क किए बिना मरता है और सच्चे दिल से तौबा करता है, तो अल्लाह चाहे तो हर गुनाह माफ़ कर सकता है।

Q. अल्लाह की रहमत से मायूसी को कुफ्र क्यों कहा गया है?
A.

क्योंकि अल्लाह की रहमत से मायूस होना उसकी सिफत ‘रहमान’ और ‘गफूर’ पर शक करने जैसा है, जो कि कुफ्र है।


नतीजा (Conclusion)

अल्लाह हमें अपनी रहमत के साये में रखे और हमारे गुनाहों को माफ़ फरमाए। आमीन।

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